
सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री जी
भारत सरकार, नई दिल्ली
विषय: SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के निष्पक्ष एवं संतुलित क्रियान्वयन हेतु एक नेपाली फिल्म लेखक-निर्देशकका विनम्र निवेदन
माननीय प्रधानमंत्री जी,
सादर प्रणाम।
मैं जगदीश्वर थापा, नेपाल का एक फिल्म लेखक हूँ। भारत मेरे लिए केवल पड़ोसी देश नहीं, बल्कि समान सभ्यता, संस्कृति, कला, भाषा और मानवता से जुड़ा अत्यंत आत्मीय देश है। नेपाल और भारत दो अलग-अलग राष्ट्र हैं, परंतु हमारी जनता के संबंध सदियों पुराने हैं।
इसी आत्मीयता, चिंता और विश्वास के आधार पर मैं यह विनम्र पत्र आपके समक्ष रख रहा हूँ।
मैं स्पष्ट रूप से मानता हूँ कि जातिगत भेदभाव और अत्याचार से पीड़ित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों की सुरक्षा आवश्यक है। मेरा उद्देश्य इस कानून के संरक्षण को समाप्त करना या कमजोर करना नहीं है।
मेरा स्पष्ट आग्रह केवल इतना है कि कानून का संरक्षण वास्तविक पीड़ित को मिले और उसका दुरुपयोग होने पर निर्दोष नागरिक के अधिकार भी सुरक्षित रहें।
इसी उद्देश्य से मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूँ कि सरकार इस विषय पर विशेषज्ञों और सभी संबंधित पक्षों के साथ समीक्षा एवं संवाद करे तथा यह सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार करे कि—
• वास्तविक अत्याचार की शिकायतों में पीड़ित को तत्काल और प्रभावी संरक्षण मिले;
• शिकायतों की जाँच निष्पक्ष, तथ्याधारित और विधिसम्मत हो;
• केवल आरोप लग जाने के कारण किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक कानूनी एवं सामाजिक पीड़ा न सहनी पड़े;
• यदि सक्षम प्रक्रिया से कोई शिकायत जानबूझकर झूठी या दुर्भावनापूर्ण सिद्ध हो, तो उसके लिए कानून के अंतर्गत उचित उपचार उपलब्ध हो;
• आरोपी व्यक्ति को भी निष्पक्ष प्रक्रिया और न्यायिक संरक्षण का अधिकार प्रभावी रूप से प्राप्त हो;
• और कानून के वास्तविक प्रभाव की समय-समय पर आँकड़ों तथा न्यायिक अनुभवों के आधार पर समीक्षा होती रहे।
मेरी अपील कानून के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्याय के संतुलन के पक्ष में है।
मेरा विश्वास है कि पीड़ित को न्याय और निर्दोष को न्याय—दोनों एक साथ संभव हैं।
माननीय प्रधानमंत्री जी,
मैं भारत को दोष देने नहीं आया हूँ। यदि नेपाल में कोई परिस्थिति भारत के हमारे आत्मीय पड़ोसियों को चिंतित करे, तो हम भी उनके सुझाव और सद्भावना का सम्मान करेंगे। उसी भावना से, नेपाल में किसी विषय को लेकर चिंता उत्पन्न होने पर भारत के प्रति चिंता, सहयोग और मित्रतापूर्ण सलाह व्यक्त करना मैं अपने समान सभ्यता और गहरे जनसंबंधों के प्रति एक स्वाभाविक जिम्मेदारी मानता हूँ।
कृपया मेरी इस बात को विरोध या किसी समुदाय के विरुद्ध वक्तव्य के रूप में नहीं, बल्कि भारत के प्रति सम्मान रखने वाले एक नेपाली कलाकार की मानवीय और मित्रवत अपील के रूप में स्वीकार करें।
मानवता हमारी साझा भाषा है।
न्याय हमारी साझा आशा है।
और भारत-नेपाल की मित्रता हमारी साझा विरासत है।
सादर एवं अत्यंत सम्मान सहित,
जगदीश्वर थापा
फिल्म लेखक- निर्देशक, नेपाल
काठमांडू, नेपाल
दिनांक: २०२६ अक्टुवर ३


+ There are no comments
Add yours